kyon hua hai pyar mujhe valentine poem

Valentine Kavita in Hindi

क्यों हुआ था प्यार मुझे

 

मिलो कभी तो पूछो मुझ से,
क्यो हुआ था प्यार मुझे।
दिल मिले तो बोलूं तुमसे,
क्यो हुआ इकरार मुझे।।

काले मेघ घने थे उस दिन
बाल खुले थे घने घने।
मैंने जाकर पूछा उनसे
क्यो घने हो मेघ बड़े।।

जवाब मिला ना कोई उस दिन
चल पड़े हम दूर बड़े ।
मंजिल थी दूर मगर ,
हौसले थे खूब बड़े।।

रहे बेचैन हम काफी कुछ दिन
फिर भेजा संदेश उन्हें।
सात जन्मों के साथ का
भेजा था पैग़ाम उन्हें।।

नज़रों का तो पता नहीं
जवाब मिला था होंठो से ।
फिर डाले हाथों में हाथ
चल पड़े हम दूर बड़े।।

उम्र भी अब वो नहीं ।
दौर अब वो रहा नहीं।
प्रेम तुमसे अब भी उतना ।
जैसे बरसे थे मेघ घने।।

By "केवल" रुचिर

IT Professional | Legal Expert | Writer

One thought on “क्यों हुआ था प्यार मुझे : केवल रुचिर की वैलेंटाइन कविता”

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