अवचेतन-मन-को-कैसे-जगाए

अवचेतन मन की शक्ति

जब अवचेतन ध्यान में हृदय को शांत किया जाता है, और योगी भौंहों के बीच मज्जा या बिंदु के आध्यात्मिक केंद्र को उत्तेजित करता है, तो वह धारणा के आंतरिक और बाहरी खोज को नियंत्रित कर सकता है। जब वह स्थूल इंद्रियों की आकांक्षा बंद करता है, तो सभी भौतिक विक्षेप गायब हो जाते हैं। तब अहंकार स्वत: आत्मा द्वारा धारण किए गए प्रबलित आंतरिक खोज के माध्यम से, उस अनन्य साम्राज्य की सत्ता के सुंदरता को निहारने लगता है।

अतिचेतनता में हृदय-शांत योगी प्रकृतिप्रदत्त ज्ञान रूपी रोशनी देखने में सक्षम हो जाता है, सूक्ष्म ध्वनियों को सुनने के लिए स्वतः कान खुल जाते है बाह्य चेतन अवस्था में । मनुष्य ईश्वर की सक्रिय अभिव्यक्ति को सुंदर ब्रह्मांडीय ऊर्जा के रूप में नहीं देखता है जो अंतरिक्ष के हर बिंदु में मौजूद है, और वो केवल मानवीय चेहरों के, फूलों के, और प्रकृति की अन्य सुंदर स्थूल आयामी रूपों को मानता है। आत्मा अपनी सूक्ष्म-दृष्टि, कभी जलती हुई, कभी बदलती, कभी भटकती हुई, ब्रह्मांडीय ऊर्जा के फव्वारे की रोशनी के माध्यम से सभी परमाणुओं के सूक्ष्मतम छिद्रों के माध्यम से ध्यान आकर्षित करने के लिए मनुष्य को लालायित करता है।

प्रकृति या जीवित मनुष्यो की शारीरिक सुंदरता क्षणभंगुर है, इसकी धारणा आंखों की देख पाने की शक्ति पर निर्भर करती है। कॉस्मिक एनर्जी की सुंदरता चिरस्थायी है, और इसे भौतिक आंखों के बिना देखा जा सकता है। ईश्वर के स्पंदन में प्रकाश के सूक्ष्म क्षेत्र में ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक भव्य दर्शन करता है। दृश्यों, स्वर्ग समान प्रकृति की सूक्ष्म व स्थूल सुंदरता, सभी अनंत ब्रह्मांड के मंच पर अपने बदलते स्वरूपो की अपनी अपनी असीम आकर्षक भूमिका निभाते हैं। इस पैनोरमा को निहारते हुए, योगी फिर से प्रकृति में बदली हुई सुंदरता की अस्थिर वस्तुओं, जिससे वह कभी भी जुड़ा नहीं हो सकता है और न ही पृथ्वी से किसी भी चिरस्थायी सौंदर्य की उम्मीद कर सकता है, को निहारता हुआ सोंचता है। तो सबसे उत्तम चेहरे में भी तने हुए मुख पर भी झुर्रियों का आगमन हो ही जाता है, यह अपने चक्र में सदैव चलता रहता है।

वास्तव में योगी को भौतिकता में किसी भी शाश्वत सौंदर्य के लिए आसक्ति नही होती है। मृत्यु युवाओं की कलियों को नष्ट कर देगी, इस धरती के समस्त जीव को विनाश कर देगी, लेकिन सूक्ष्म ब्रह्मांड के वैभव (और अभी भी सूक्ष्म दुनिया से जिसमें सभी ब्रह्मांडीय कलात्मकता का उत्सर्जन होता है) के वैभव को नष्ट नहीं कर सकते हैं। सूक्ष्म परमाणु इस सूक्ष्म क्षेत्र में एक की कल्पना के मात्र प्रकाश के अद्भुत रूपों को ग्रहण करते हैं, और जब यह चाहते हैं तो गायब हो जाते हैं। वे फिर से जागते हैं, सौंदर्य की एक नई माला में, उसके आह्वान पर।

By अभिषेक कुमार

IT Professional | Musician | Random Yogi

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