Tulsi plant benefits

Tulsi Plant Benefits in Hindi

मैं तुलसी तेरे आंगन की

एक ऐसा पौधा है जिसका हमारे हिंदू धर्म में काफी महत्व है। यह भारत की संस्कृति का एक हिस्सा रहा है, जो लगभग सभी हिन्दू घरों के आंगन में लगाया जाता है।

यह औषधीय गुणों से भरपूर एक दुई पत्री तथा शाक्य पौधा है। यह 1 से 4 फुट ऊंचा होता है। इसकी पत्तियां बैगनी आभा वाली हल्के रोए से ढकी होती है। पत्तियां 1 से 2 इंच लंबी सुगंधित और अंडाकार या आयताकार होती है। इसमें बैगनी रंग के छोटे-छोटे पुष्प 6 से 8 इंच लंबी मंजरियों में सघन चक्रों में आते हैं।

इसका बीज अंडाकार या गोलाकार, कुछ चटपटा, प्रायः चिकने भूरे या रक्ताभ (लाल आभा), छोटे काले धब्बों से युक्त होते हैं।

तुलसी के नए पौधे मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में उगते हैं। शीत ऋतु में इसमें पुष्प जाती है। यह पौधा दो से 3 वर्षों तक हरा भरा रहता है उसके बाद इसकी पत्तियां छोटी और कम पड़ जाती हैं तथा तना सूख जाता है।

 

पूर्व काल में हमारे ऋषि-मुनियों को इसके औषधीय गुणों का ज्ञान अच्छी तरह प्राप्त था। इसीलिए उन्होंने जनसाधारण की भलाई हेतु इसे धर्म और संस्कृति से जोड़ दिया। यह पौधा प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन देता है, कई प्रकार की हानिकारक कीटाणुओं का नाश करता है।

वातावरण को शुद्ध रखता है, इसीलिए आंगन में तुलसी पौधा का होना अनिवार्य बना दिया गया। इसके कई घरेलू औषधीय प्रयोग भी हैं, जिसकी जानकारी अधिकतर घरों में होती ही होती है।

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तुलसी को कई नामों से जाना जाता है

तुलसी का लैटिन नाम ओसीमम सैंक्टम (Ocimum Sanctum) है।

वृंदा, वृंदावनी विश्व पूजिता विश्व पावनी ।

पुष्प सारा नंदनी जो तुलसी कृष्ण जीवनी।

यह इसके संस्कृत नाम है। हिंदी, गुजराती, मराठी, बंगला में इसे तुलसी नाम से ही जाना जाता है। इसके अलावा कई जगहों पर इसके नाम अलग-अलग भी हैं, जैसे कन्नड़ में श्री तुलसी, राजस्थान में तुलसा, मलयालम में मित्तबू इत्यादि।

यह लैमीएसी (Lamiaceae) कुल का पौधा है, जिसका वैज्ञानिक नाम ओसीमम टेनीफ्लोरम (Ocimum Tenuiflorum) है। यह भारत में प्रायः सभी जगहों पर पाई जाती है। हिमालय पर यह 6000 फीट की ऊंचाई तक मिलती है। ऑस्ट्रेलिया, वर्मा, श्रीलंका आदि स्थानों पर भी तुलसी पाई जाती है।

 

तुलसी के कितने प्रकार हैं?

चरक संहिता के अनुसार तुलसी की 8 जातियां हैं – सुमुख, सूरस, कुठेरक, अर्जक, गंडीर, काल मालक, पर्णास, क्षवक और फणिन्झ। वर्तमान में साक्ष्य प्रमाण के अनुसार पृथ्वी पर मुख्य रूप से अधिक उपयोग में आने वाली तुलसी पांच प्रकार की है – हरी पत्तियों वाली राम तुलसी, बैंगनी पत्तियों वाली श्याम तुलसी, श्वेत पत्तियों वाली विष्णु तुलसी, जंगली किस्म की हरे पत्तियों वाली वन तुलसी और नींबू तुलसी।

तुलसी का महत्व समझना जरुरी है (Tulsi Plant Benefits in Hindi)

तुलसी को जड़ी बूटियों की रानी और जीवन के लिए अमृत कहा जाता है।

औषधीय महत्व – कफ सिरप, सर्दी की औषधियां, खांसी की गोलियां, कई फार्मास्युटिकल्स औषधियों में तुलसी प्रयुक्त होती है। इसके अलावा सौंदर्य प्रसाधन में भी आयुर्वेदिक दवाओं में काम लिया जाता है।

यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करने में बहुत कारगर है। जो इस वर्तमान वैश्विक हालात में लोगों के लिए बेहद जरुरी है।

खाद्य पदार्थों को सुभाषित करने में भी तुलसी तेल प्रयुक्त होता है।

किसी भी विषाणु जनित रोग (Viral Disease) के संक्रमण को रोकने में या हमेशा से कारगर साबित हुआ है।

यह विष नाशक, कफ नाशक, नपुंसकता, बांझपन आदि में भी औषधि के रूप में आयुर्वेद में प्रयोग में आता रहा है।

बहुत से लोगों को चाय में तुलसी के पत्ते का फ्लेवर बहुत भाता है।

तुलसी के पत्ते को चबाने पर तनाव भी कम होता है।

तुलसी की पत्तियों में विटामिन A है, जिसके कारण इसमें एंटी ऑक्सीडेंट गुण भी है। इसकी पत्तियों के रस (तुलसी अर्क) को आँखों में डालने पर सूजन आदि पर काम करता है।

अतः सर्वगुण संपन्न इस तुलसी पौधे को प्रकृति में बचा कर रखना बहुत ही आवश्यक है।

 

By कुनमुन सिन्हा

शुरू से ही लेखन का शौक रखने वाली कुनमुन सिन्हा एक हाउस वाइफ हैं।

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