Genda phool ke Fayde

Genda Phool Ke Fayde

गेंदा का फूल देवी देवताओं को काफी पसंद है

सुंदरता के साथ-साथ औषधीय गुणों से परिपूर्ण गेंदा (Marigold) एक बहुत ही खूबसूरत, सुगंधित फूल है, जिसे हम सभी पहचानते हैं। यह फूल अब सभी मौसम में मिलता है। यह फूल काफी लोकप्रिय है पूजा से लेकर साज-सज्जा में इसका काफी प्रयोग किया जाता है। ऐसा मानना है कि गेंदा का फूल देवी देवताओं को काफी पसंद है इसलिए इसका धार्मिक महत्व भी है। इसे पसंद करने का एक कारण यह भी है कि यह सुंदर, सुगंधित होने के साथ-साथ लगभग एक सप्ताह तक ताजा रहता है।

गेंदा भारत के सभी क्षेत्रों में पाया जाता है। घरों में तो लोग इसे लगाते ही हैं व्यावसायिक उद्देश्य से इसकी खेती प्रचुर मात्रा में की जाने लगी है। गेंदा का पौधा 3 से 4 फुट लंबा जिसका जीवनकाल 4 महीने का होता है। यह विभिन्न रंगों में पाया जाता है पीला और नारंगी सबसे आम है।

भारत में अफ्रीकन और फ्रेंच गेंदे की खेती होती है। यूं तो गेंदा फूल की कई प्रजातियां हैं लेकिन इनमें से मुख्य हैं- हजारा (इस का फूल बड़ा होता है) सुरनाई कौकहान (लाल और पीले रंग के दल चक्र वाला)

गेंदा के विभिन्न नाम 

गेंदा का वानस्पतिक नाम (botanical name) टैगेटस इरेक्टा (tegetas erecta) होता है।

हिंदी में – गेंदा, गुल्तोरा, कलग, लालमुरुग, हजारा, मखमली

संस्कृत में – झंडू, गनेरुक, स्थूल पुष्प

अंग्रेजी में – मैरीगोल्ड, अफ्रीकन मेरीगोल्ड, फ्रेंच मेरीगोल्ड, बिग मेरीगोल्ड

उर्दू – गेंदा

कोंकण – गोन्डेफुल

कन्नड़ – चंडुमल्लीगे

ओरिया – गेंदु

गेंदा फूल के फायदे जानकर आप भी चौंक जायेंगे

बहुतायत रूप से सजावट में आने वाले इस गेंदा पुष्प के कुछ खास औषधीय गुण भी होते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक होता है। बहुत सारी बीमारियों के उपचार में इसका प्रयोग किया जाता है।

आंख, कान, त्वचा, पाचन तंत्र, घाव इत्यादि कई बीमारियों के उपचार में दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है।

इसके तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में किया जाता है।

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गेंदे की पत्तियों का पेस्ट फोड़े के उपचार में, गेंदे पत्ते का सत्व कान दर्द में, पुष्प सत्व रक्त स्वच्छ, बवासीर के उपचार तथा अल्सर और नेत्र संबंधी रोगों में उपयोगी माना जाता है। टैगेटस की विभिन्न प्रजातियों में उपलब्ध तेल इत्र उद्योग में प्रयोग किया जाता है।

गेंदा जलन को नष्ट करने वाला, मरोड़ को कम करने वाला, कवक को नष्ट करने वाला, पसीना लाने वाला, आर्तवजनकात्मक होता है।

इसे टॉनिक के रूप में भी उपयोग किया जाता है। इसके उपयोग से दर्द युक्त मासिक स्राव, एक्जिमा, त्वचा के रोग, गठिया, मुंहासे, कमजोर त्वचा और टूटी हुई कोशिका में लाभ होता है।

गेंदा का फूल ज्यादातर लोगों के घरों में उपलब्ध होता ही है। अतः लोगों को इसके कुछ घरेलू उपचार की जानकारी होनी आवश्यक है।

गेंदा के कुछ घरेलू उपयोग निम्न प्रकार है

  • हाथ- पैर या शरीर के किसी भी अंग (आंखों के भीतरी भाग को छोड़कर) के कट जा छिल जाने पर गेंदा के पत्तों को मसल कर उसका रस डाल दें अगर खून निकल रहा हो तो उसी मसले हुए पत्ते से कटे स्थान को कुछ देर के लिए दबाकर रखें, खून को रोकने के साथ-साथ घाव को सूखने में मदद करता है।
  • जख्म होने पर शुद्ध सरसों तेल में गेंदा के पत्तों का रस डालकर गुनगुना करके उस घाव पर डालने से फायदा होता है।
  • कान के दर्द में गेंदा के पत्ता का रस दो-दो बूंद डालने से फायदा होता है।
  • नाक से खून निकलने पर भी इसके पत्ते का रस एक या दो बूंद डालना फायदेमंद होता है।
  • गेंदे के पत्ते को पीसकर फोड़े फुंसी और बवासीर के मस्से पर लगाने तथा घाव पर लगाने से आराम मिलता है।
  • बिवाई (हाथ- पैर की त्वचा का फटना एरियों का फटना) के उपचार के लिए गेंदा के पत्ते के रस को वैसलीन में मिलाकर लगाना फायदेमंद होता है।
  • गेंदा के पत्ता को पीसकर गुनगुना कर फोड़े फुंसी पर लेप, यह डायबिटीज की अवस्था में होने वाले फोड़े फुंसी के लिए फायदेमंद है।
  • मिश्री के साथ गेंदा का फूल खाने से दमा, खांसी में फायदा मिलता है।
  • गेंदा के फूल का रस नारियल तेल के साथ मिलाकर उससे हल्की-हल्की मालिश करके नहा लिया जाए तो सिर में हुए किसी भी तरह के संक्रमण, फोड़े- फुंसियों में आराम मिल जाता है।
  • गेंदे का फूल हानिकारक कीटाणुओं और कीड़ों को दूर रखता है। इसे लगाने से मलेरिया पैदा करने वाला मच्छर भी भाग जाता है।
  • मुहासे पर कैलेंडुला का तेल युक्त क्रीम लगाने पर मुहासे समाप्त होते हैं तथा यह त्वचा के दाग धब्बे को दूर करता है।
  • गेंदे के फूल से बने तेल से चेहरे पर नियमित रूप से मालिश करने से त्वचा में रक्त का संचार बढ़ता है और रंग निकलता है।
  • इसके तेल या क्रीम को झुर्रियों वाली त्वचा पर लगाने से झुर्रियां हट जाती हैं।
  • गेंदे की दो- तीन पत्तियों को तेल में अजवाइन और लहसुन के साथ डालकर गर्म करके छान लें। यह तेल कान के दर्द में फायदेमंद होता है।
  • गेंदा के फूल का प्रयोग बवासीर के उपचार में भी किया जाता है।
  • इससे श्वसन संबंधी विकार की दवाएं भी तैयार की जाती है।

गेंदे के फूल से प्राकृतिक रंग भी बनाया जाता है। इत्र बनाने के काम भी आता है गेंदा फूल। इसलिए अगर आपको जरा भी बागवानी का शौक हो तो इस वर्ष क्यारियों में गेंदा के पौधे जरूर लगाइये। खूबसूरती बिखेरने के साथ साथ साथ गेंदा फूल आपके स्वास्थ्य की भी देखभाल करेगा।

By कुनमुन सिन्हा

शुरू से ही लेखन का शौक रखने वाली कुनमुन सिन्हा एक हाउस वाइफ हैं।

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