वो औरत कौन थी ?
रात के 12:45 बजे जब हम घर पहुँचे, तो ऐसा लगा जैसे मौत को टक से छूकर लौटे हों। थकान शरीर में थी, पर दिल में बस एक सवाल —…
कोई पहलू न छूटे
रात के 12:45 बजे जब हम घर पहुँचे, तो ऐसा लगा जैसे मौत को टक से छूकर लौटे हों। थकान शरीर में थी, पर दिल में बस एक सवाल —…
ये कहानी एक छाते की है। जिसे मैंने खरीदा था, मलेशिया के कुआलालंपुर में। मेरे जीवन का पहला इंटरनेशनल ट्रिप। मेरे हसबैंड विवेक के साथ। हम अप्रैल के महीने के…
हमारे सुख में भी, हमारे दुःख में भी – God is inside us ढूंढते रहे जिन्हे हम ताउम्र अपने दिलों और दिमाग में बिठाकर, पर जब वो मिले तो ऐसा…